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संभव नहीं है | Sambhav Nahi Hai | Neeraj Ji Poetry Motivation | शुक्रवार की शाम, एक कविता के नाम…

SUDARSHAN AGRAWAL3.8K views3mo agoGeneral

पंथ की कठिनाइयों से मान लूं मैं हार, यह संभव नहीं है। मैं चला जब सामने दीवार-सी दुनिया खड़ी थी, मैं हँसा तब भी, बनी जब आँख सावन की झड़ी थी। उस समय भी मुस्कुरा कर गीत मैं गाता रहा था, जबकि मेरे सामने ही लाश खुद मेरी पड़ी थी। आज है यदि देह लथपथ, रक्तमय पग, कंटकित मग, फेंक दूँ निज शीश का मैं भार — यह संभव नहीं है। पंथ की कठिनाइयों से मान लूं मैं हार, यह संभव नहीं है। चल रहा हूँ मैं इसी से चल रही निर्जीव राहें, जल रहा हूँ मैं इसी से हो गई उजली दिशाएँ। रात मेरी आँख का काजल चुरा कर ले गई है, छीन कर उच्छ्वास मेरे बन गई आँधी हवाएँ। आज मेरी चेतना से ही चेतन हुई प्रकृति है, मैं बनूँ जड़ धूल का आधार — यह संभव नहीं है। पंथ की कठिनाइयों से मान लूं मैं हार, यह संभव नहीं है। पूछती है एक मुझसे प्रश्न फिर भी सृष्टि सारी, क्या तुम्हारी भाँति ही व्याकुल पथिक मंज़िल तुम्हारी? कौन उत्तर दूँ भला — मैं सिर्फ इतना जानता हूँ, राह पर चलती हमारे साथ ही मंज़िल हमारी। आज तम में वह अगर ओझल हुई है लोचनों से, मैं करूँ उसकी न सुधि साकार — यह संभव नहीं है। पंथ की कठिनाइयों से मान लूं मैं हार, यह संभव नहीं है। मैं मुसाफ़िर हूँ कि जिसने है कभी रुकना न जाना, है कभी सीखा न जिसने मुश्किलों में सर झुकाना। क्या मुझे मंज़िल मिलेगी या नहीं — इसकी न चिंता, क्योंकि मंज़िल है डगर पर सिर्फ चलने का बहाना। और तो सब धूल पथ पर — चाह चलने की अमर बस, मैं अमर पद का न लूँ अधिकार — यह संभव नहीं है। पंथ की कठिनाइयों से मान लूं मैं हार, यह संभव नहीं है। -- #SambhavNahiHai #GopaldasNeeraj #HindiPoetry #PoetryRecital #Kavita #HindiKavita #MotivationHindi #InspirationDaily #PoetryLovers #IndianPoetry #SpokenWordIndia #ReelPoetry #PoetryReels #PositiveVibes #KeepGoing #NeverGiveUp #StudentMotivation #LifeLessons #DesiPoetry #VoiceOfPoetry

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